📘 घर खरीदते समय सावधानियाँ – सम्पूर्ण मार्गदर्शिका
---
अध्याय 1 : भूमिका
घर खरीदना जीवन का एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक फैसला होता है। यह केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और भविष्य की स्थिरता का प्रतीक है। ज़्यादातर लोग जीवन में एक या दो बार ही घर खरीदते हैं, इसलिए इसमें की गई गलती सालों तक परेशान कर सकती है।
आजकल विकल्प भी बहुत हैं—बिल्डर प्रोजेक्ट, पुराना मकान, गाँव या शहर की ज़मीन, EMI या कैश। हर विकल्प के अपने फायदे और नुकसान हैं।
इस गाइड में हम घर खरीदने की हर ज़रूरी सावधानी को विस्तार से देखेंगे।
---
अध्याय 2 : कैश बनाम लोन (EMI) से घर खरीदना
1. कैश से घर खरीदना
फायदे:
ब्याज का बोझ नहीं।
EMI की चिंता नहीं।
तुरंत मालिकाना हक़।
बैंक की झंझटें नहीं।
नुकसान:
एक साथ इतनी रकम जुटाना कठिन।
टैक्स विभाग की नज़र।
इमरजेंसी फंड कम हो सकता है।
👉 निष्कर्ष: कैश तभी जब पैसा सफेद (Legal) हो और इमरजेंसी फंड अलग हो।
---
2. लोन/किश्त से घर खरीदना
फायदे:
कम डाउन पेमेंट में घर मिल जाता है।
टैक्स में छूट (80C, 24(b))।
EMI के हिसाब से बोझ बंट जाता है।
नुकसान:
ब्याज बहुत अधिक।
EMI नौकरी/बिज़नेस पर बोझ।
लोन न चुका पाने पर घर नीलाम।
👉 निष्कर्ष: EMI आपकी मासिक आय का 30–40% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
---
3. कैलकुलेशन उदाहरण
50 लाख का घर, 40 लाख लोन, 9% ब्याज, 20 साल →
EMI = ~36,000
कुल भुगतान = ~86 लाख
ब्याज ही 46 लाख से ज़्यादा।
---
अध्याय 3 : कानूनी जाँच
1. टाइटल डीड – मालिक वही है या नहीं।
2. सेल डीड – वास्तविक ट्रांसफर का प्रमाण।
3. एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC) – कोई पुराना लोन/केस तो नहीं।
4. रजिस्ट्री और म्यूटेशन – आपके नाम पर हो।
5. NOC और नक्शा – नगर निगम/प्राधिकरण से पास।
6. RERA रजिस्ट्रेशन – नए प्रोजेक्ट के लिए अनिवार्य।
7. पावर ऑफ अटॉर्नी – वैधता जांचें।
---
अध्याय 4 : लोकेशन का चुनाव
1. कनेक्टिविटी – सड़क, मेट्रो, बस, रेलवे पास हो।
2. आस-पास सुविधाएँ – स्कूल, अस्पताल, मार्केट, पार्क।
3. सुरक्षा – पुलिस स्टेशन, CCTV, गेटेड सोसाइटी।
4. भविष्य का विकास – प्रॉपर्टी वैल्यू बढ़ेगी या नहीं।
5. पर्यावरण – शोर, प्रदूषण, बाढ़ क्षेत्र से बचें।
👉 लोकेशन सबसे अहम है। सही जगह छोटा घर भी बेहतर निवेश बन सकता है।
---
अध्याय 5 : बिल्डर से घर खरीदते समय सावधानियाँ
1. बिल्डर का इतिहास और साख देखें।
2. प्रोजेक्ट का RERA नंबर चेक करें।
3. कंस्ट्रक्शन क्वालिटी का निरीक्षण करें।
4. टाइमलाइन – डिले होने पर क्या पेनल्टी है?
5. मेंटेनेंस चार्ज और अन्य छिपी लागत।
---
अध्याय 6 : पुराना घर खरीदने की सावधानियाँ
1. पुराने मालिक से लिखित समझौता।
2. घर की उम्र (20–25 साल से पुराना हो तो संरचना जांचें)।
3. बिजली-पानी-बकाया बिल क्लियर।
4. संपत्ति विवाद या कोर्ट केस तो नहीं।
5. नेबरहुड देखें।
---
अध्याय 7 : लोन लेते समय सावधानियाँ
1. ब्याज दर (फिक्स्ड या फ्लोटिंग)।
2. प्रोसेसिंग फीस।
3. प्रीपेमेंट चार्ज।
4. बीमा (Loan Insurance) लें।
5. EMI आपकी इनकम का 40% से कम रखें।
---
अध्याय 8 : टैक्स और सरकारी नियम
1. होम लोन पर 80C (1.5 लाख) और 24(b) (2 लाख) छूट।
2. रजिस्ट्री पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस।
3. प्रॉपर्टी टैक्स समय पर भरें।
4. ब्लैक मनी से डील न करें।
---
अध्याय 9 : इंटीरियर और मरम्मत
1. घर लेते ही छोटे-मोटे काम होंगे।
2. बजट का 10–15% इंटीरियर/फर्नीचर के लिए रखें।
3. वेंटिलेशन, रोशनी, बिजली वायरिंग जाँचें।
4. बाथरूम-किचन में लीकेज चेक करें।
---
अध्याय 10 : परिवार और भविष्य की ज़रूरतें
1. बच्चों की पढ़ाई – स्कूल/कॉलेज पास हों।
2. बुजुर्ग – हॉस्पिटल, पार्क पास हों।
3. भविष्य में परिवार बड़ा होगा तो स्पेस ज़रूरी।
4. नौकरी बदलने पर कनेक्टिविटी दिक़्क़त न बने।
---
अध्याय 11 : निवेश की दृष्टि से सावधानियाँ
1. रेंट पर देने की संभावना देखें।
2. प्रॉपर्टी वैल्यू बढ़ने की संभावना।
3. अवैध कॉलोनी या ग्रीन ज़ोन में न खरीदें।
4. शहर विस्तार की दिशा देखें।
---
अध्याय 12 : मानसिक और व्यावहारिक तैयारी
1. घर खरीदना 15–25 साल की ज़िम्मेदारी है।
2. भावनाओं से ज़्यादा दिमाग से फैसला करें।
3. जल्दबाज़ी न करें।
4. परिवार से खुलकर चर्चा करें।
---
अध्याय 13 : आम गलतियाँ जो लोग करते हैं
1. सिर्फ़ सस्ते दाम देखकर खरीदना।
2. कागज़ात जाँचने की बजाय बिल्डर पर भरोसा।
3. EMI का बोझ बढ़ा लेना।
4. छुपे हुए चार्ज न पढ़ना।
5. लोकेशन की अनदेखी।
---
अध्याय 14 : चेकलिस्ट (घर खरीदने से पहले)
✅ टाइटल डीड
✅ RERA रजिस्ट्रेशन
✅ एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट
✅ बिल्डर/पुराने मालिक की साख
✅ EMI कैलकुलेशन
✅ इमरजेंसी फंड
✅ लोकेशन विज़िट
✅ स्टांप ड्यूटी/रजिस्ट्रेशन तैयारी
---
अध्याय 15 : निष्कर्ष
घर खरीदना जीवन का सबसे बड़ा निवेश है।
कैश हो तो सही डॉक्यूमेंटेशन ज़रूरी।
EMI हो तो इनकम का संतुलन रखें।
कानूनी जाँच, लोकेशन और भविष्य की ज़रूरतें ध्यान में रखें।
जल्दबाज़ी या भावनाओं में आकर निर्णय न लें।
👉 सही प्लानिंग से खरीदा गया घर न सिर्फ़ छत देता है बल्कि जीवनभर का सुरक्षा कवच और निवेश बन जाता है।
Follow Us